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हर्बल चिकित्सा
    
        अर्जुन

अन्य भाषाओं में इसके नाम

    संस्कृत - इंद्र,वीरवृक्ष,ककुभ

    हिंदी - अर्जुन

  परिचय:-

        अर्जुन का वृक्ष पाया समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है विशेष रूप से मुंबई व मद्रास के जंगलों उत्तर प्रदेश बिहार हिमालय की तराई वाले क्षेत्र और मध्य भारत में यह अधिक पाया जाता है बाग बगीचा एवं सड़कों के किनारे इसके वृक्ष लगाए जाते हैं इसके पेड़ों की ऊंचाई लगभग 60 से 80 फुट तक होती है

इसका तनाव काफी मोटा होता है इस विशाल वृक्ष की ऊपरी छाल सफेद सी होती है
 किंतु अंदरूनी छाल मोती और गुलाबी रंग की होती है यदि इससे कांटा जाए तो इसमें
से दूधिया रस निकलता है आमतौर से वृक्ष की छाल का यही औषधियों में प्रयोग
 होता है


               प्रयोग


 अर्जुन की छाल के चूर्ण को खाने या उसका क्वाथ बनाकर दूध  के साथ पीने से हृदय रोग में बहुत लाभ होता है  विशेषताएं  ह्रदयगत रक्तवाहिनीओं की बीमारियों से बचने के लिए यह अत्यंत लाभदायक है ह्रदयगत रक्तवाहिनीओं  के संकुचन से होने वाले ह्रदयशूल में  अर्जुन की छाल का चूर्ण अथवा क्वाथ देने से बहुत लाभ होता है

                   विभिन्न रोग व उपचार
 मुंहासे

अर्जुन की छाल को पाउडर की तरह बारीक पीसकर उसमें शहद मिलाकर मुंहासे पर लगाएं लेप करने के 2 घंटे बाद चेहरे को पानी से धो ली

दिल की धड़कन तेज होना

 जब दिल सामान्य से अधिक तीव्र गति से धड़कने लगे बेचैनी हो या मन घबराए तो एक चम्मच अर्जुन की छाल का चूर्ण एक गिलास टमाटर के जूस में मिलाकर यदि धड़कन फिर भी सामान लेना हो तो यही प्रयोग दोहराए |

शरीर की बदबू

 अर्जुन और जामुन की सूखे पत्तों को बारीक चूर्ण से बंटन तैयार करके शरीर पर मले और कुछ देर बाद स्नान कर करें तो शरीर में पसीने से पैदा होने वाली बदबू समाप्त हो जाती है |

आग से जल जाना

जलने से जो घाव हो जाते हैं उन पर यदि अर्जुन की छाल का चूर्ण लगाया जाए तो वह शीघ्र भर जाता है

 कान का दर्द

 अर्जुन के पत्तों की स्वरस की 3-4 बूंदे कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है
  

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