आयुर्वेदिक टिप्स घरेलू नुस्खे

                                                            अमलतास



 अन्य भाषा में उनके नाम
संस्कृत - चतुर गुल,राज वृक्ष, कृत माल
हिंदी - अमलतास, धन बहेड़ा
    परिचय
यह पूरे देश में सभी जगह पाया जाता है मार्च अप्रैल के महीने में यह वृक्ष की पत्तियां झड़ जाती है इसके बाद इन पत्तियां और फूल प्रायः साथ ही निकलते हैं इसके बाद इसमें कलियां लगती हैं जो डेढ़ से 2 फीट लंबी गोलवा नुकीली होती है अर्थात वर्षभर लटकती रहती है
     प्रयोग
इसका प्रयोग उधर सुखी खांसी  मुख पार्क उदर शूल आदि रोगों में किया जाता है
विभिन्न रोग व उपचार
कब्ज
 इसके फलों का गुलकंद  आंत्र रोग सूक्ष्म ज्वार एवं कोस्टबद्धता में लाभदायक है
 सुख प्रसव
अमलतास की 4-5 कली की 25 ग्राम छिलकों को घोलकर उसमें शक्कर मिलाकर छान कर गर्भवती स्त्री को सुबह शाम पिलाने से बच्चा सुख से पैदा होता  है
  कुष्ठ रोग
 अमलतास की 15-20 पत्तियों से बना लिपस्टिक का नाश करता है अमलतास के 10 -15 पत्तों को पीसकर लेप करने से कुष्ठ चकत्ते चर्म रोगों में लाभ होता है
अमलतास की जड़ का लेप कुष्ठ रोग के कारण हुई फटी त्वचा को हटाकर वर्ण स्थान को समतल कर देता  है
 खांसी
अमलतास की गिरी 5 से 10 ग्राम को पानी में घोलकर उसमें तिगुना बुरा डाला गाड़ी चासनी बनाकर चाटने से सूखी खांसी मिटती है
 नाक की फुंसी
इसके पत्ते और छाल को किस करना की छोटी-छोटी फुंसियों पर लगाने से फुंसियां ठीक हो जाती है
 दाद
अमलतास की 10 से 15 ग्राम मूल्य मूल्य को दूध में घोलकर पीसकर लेप करने से दाग में लाभ होता है इसके पंचांग को जल में पीसकर दाद खुजली और दूसरे चरण में विकारों पर लगाने से लाभ होता है

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