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अपामार्ग ( चिरचिटा )



अन्य भाषा में इनके नाम  
संस्कृत में - अपामार्ग सीकरी
हिंदी में - चिरचिटा लटजीरा
                परिचय
अपामार्ग का पौधा खेतों में घास के साथ पर आया पाया जाता है यह सुख स्थानों पर पैदा होता है यह पौधा लगभग 2 से 4 फुट ऊंचा होता है इसकी दो किस में पाई जाती है लाल और सफेद लाल अपामार्ग के डंठल लाल और उन पर लाल रंग का दाग होते हैं जबकि सफेद अपामार्ग के डेंटल हरे रंग का होता है जिन पर सफेद भूरे रंग के दाग होते हैं इस पर शक्ति और कुछ गोल आकार के फल उगते हैं|
                 प्रयोग
अपामार्ग का प्रयोग गंजापन दूर करने, तीली का आकार सामान्य करने, खांसी चर्म आदि में आदि में किया जाता है
विभिन्न रोग व उपचार
स्वप्नदोष
अपामार्ग की जड़ का चूर्ण और मिश्री बराबर की मात्रा में मिलाकर रोजाना एक चम्मच की मात्रा में दिन में 2-4 बार सेवन करने से स्वप्नदोष समाप्त हो जाता है
गंजापन
अपामार्ग के पत्तों को जलाने के बाद सरसों के तेल में मसल मसले इस प्रकार मरहम तैयार हो जाते हो जाएगा यदि यह मरहम को गंज वाली जगह पर नियमित रूप से लगाए तो गंजेपन की जगह नए बाल उग जाते हैं
मोटापा
अपामार्ग की खीर बनाकर रोजाना सेवन करने से शरीर में जमा हुई अतिरिक्त चर्बी घटने लगती है
गर्भधान और संतान प्राप्ति के लिए
अपामार्ग की जड़ को साफ करके उसका रस 5 ग्राम की मात्रा में मासिक धर्म समाप्त होने के बाद 21 दिनों तक लगातार सेवन किया जाए तो गर्भ ठहर जाता है
अपामार्ग की ताजी पत्तियों का रस 10 मिलीलीटर दो चम्मच को 200 मिलीलीटर दूध के साथ मासिक धर्म समाप्त होने के बाद सेवन किया जाए तो गर्भ ठहरने की संभावना होती है
प्रसव पीड़ा अथवा प्रसव में विलंब होने पर
यदि गर्भवती महिला को प्रसव से पहले बहुत दर्द हो और प्रसव होने की होने में देर हो रही हो तो उसके कटी प्रदेश में अपामार्ग की जड़ बांधने से प्रसव आसानी से जल्दी और बिना दर्द हो जाता है परंतु बच्चा होने के तुरंत बाद जड़ को उसी समय हटा दी वरना गर्भ आशाएं भी बाहर निकल  पड़ेगा|
पुष्य नक्षत्र या रविवार के दिन जड़ समिति उखड़ी गई अपामार्ग की जड़ काले कपड़े में लपेटकर गर्भवती महिला की गले में बांधने से भी प्रशासन और आसानी से हो जाता है परंतु प्रसव के फौरन बाद बांधी हुई जड़ को हटा दो वरना गर्भाशय बाहर आ जाएगा
तिल्ली का बढ़ना
अपामार्ग की जड़ का चूर्ण 15 से 25 ग्राम तक दिन में दो बार लस्सी और दही के साथ तीन 4 सप्ताह तक नियमित रूप से सेवन करने से तीली का आकार सामान्य हो जाता है और सूजन कम हो जाती है
मलेरिया ज्वार से बचाव
जिन दिनों मलेरिया जीवन फैलने की आशंका हो उन दिनों मलेरिया से बचाव के लिए अपामार्ग के पत्ते और काली मिर्च को समान मात्रा में लेकर पीस लें और फिर उसमें थोड़ा सा गुड़ मिलाकर मटर के आकार की गोलियां बना ले यदि मलेरिया फैलने की आशंका हो या मलेरिया फैल रहा है तो नियमित रूप से दो-चार दिन तक एक-एक गोली भोजन की बाद ली
खांसी दूर करने के लिए
अपामार्ग बूटी की भस्म तैयार करके उसे चार गुनी पानी में भिगोकर रात को रख दे इस पानी को भाप पैदा होने तक उबालें उबालने के बाद उसे छीन ली उसकी मात्रा चौथाई से आधा चम्मच रोजाना दो से तीन बार सेवन करने से पराया सभी प्रकार की खांसी में लाभ होता है
दंत रोग
यदि दांत कमजोर हो गए हो तो अपामार्ग की फूलों की मंजूरी को पीसकर उससे दांतो की मालिश करें दांतों में पीड़ा हो तो अपामार्ग के पत्तों का रस पीड़ा हो रहे दांतो पर लगाएं
दांतो की बदबू दूर करने और दांतो को मजबूत करने के लिए रोजाना अपामार्ग की जड़ या तने की दातुन करें इससे अन्य दांत रोग भी दूर हो जाते हैं

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